સોમવાર, 1 જુલાઈ, 2013

अहमदाबाद ravish kumar


अहमदाबाद

अहमदाबाद
दंगों के बाद का शहर
पतली टांगों में फंसी जिन्स का शहर
लिवाइस जीन्स का खरीदार शहर
मारे गए लोगों के लिए रोता नहीं है
वह नया ब्रांड पहनता है
जैन पिज़्‍ज़ा खाता है
और नवरात्रा में कंडोम की बिक्री बढ़ाता है

अहमदाबाद

मोदी पर मंत्रमुग्ध है शहर
मॉल के माल पर मालामाल है शहर
गोधरा से पहले और बाद के दंगों से भागता
एक्सक्लेटर से गड्ढे में उतरता एक कतराता शहर
सब दोषी है
लेकिन पहले वो दोषी हैं
गोधरा के बाद ही हम दोषी हैं
हिसाब किताब करता एक अच्छा सा साहूकार शहर

अहमदाबाद

दंगों में मारे गए लोगों के लिए रोता नहीं है
प्लाईओवर पर भागता रहता है
हवाई जहाज़ में छुपता रहता है
स्टाक एक्सचेंज में गिरता चढ़ता है
कांग्रेस को गरियाता
मोदी को मर्द बताता है

अहमदाबाद

दंगों में मारे गए लोगो के लिए रोता नहीं है
रात भर नाचता रहता है
जासूस की निगाहों से बचता हुआ
जल्दी से कहीं रात गुजार देता है
नवरात्रा में कंडोम की बिक्री बढ़ाता है

अहमदाबाद

हादसों को भूल जाने वाला शहर
हादसे के बाद घर में छुप जाने वाला शहर
मर्दानगी ढूंढता रहता है नेता में
वह मोदी को पसंद करता है
बिजली पानी की कमी नहीं
वह एक मर्द को ढूंढता रहता है
दंगों में मारे गए लोगों के लिए रोता नहीं है

अहमदाबाद

एक ही तो नेता हुआ है शहर में
गोधरा के पहले का सच
गोधरा के बाद का सच
कभी एक से छुपता है
तो कभी एक से भागता है
मर्दों की मर्दानगी वाले इस शहर में
सिर्फ एक ही मर्द क्यों मिलता है
अहमदाबाद
दंगों में मारे गए लोगों के लिए रोता नहीं हैं

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